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Neatherland, Praveen Kumar Jha

History

Nastikon ke desh mein: Netherlands

Original price was: ₹149.00.Current price is: ₹139.00.
लेखक प्रवीण झा शहरों और देशों के विचित्र पहलूओं में रुचि रखते हैं। आईसलैंड के भूतों के बाद यह अगला सफर नीदरलैंड के नास्तिकों की तफ़्तीश में है। इस सफर में वह नास्तिकों, गंजेड़ियों और नशेड़ियों से गुजरते वेश्याओं और डच संस्कृति की विचित्रता पर आधी नींद में लिखते नजर आते हैं। किताब का ढाँचा उनकी चिर-परिचित खिलंदड़ शैली में है, और विवरण में सूक्ष्म भाव पिरोए गए हैं। यह एक यात्रा-संस्मरण न होकर एक मन में चल रहा भाष्य है। भिन्न संस्कृतियों के साम्य और द्वंद्व का चित्रण है। इसी कड़ी में उनका सफर एक खोई भारतीयता का सतही शोध भी करता नजर आता है। This book will be dispatched within 7 Days of placing an order
Mithila Ki Ranbhumi, Mithila, Mantunma, Sunil Kumar Bhanu,

History

Mithila Ki Ranbhumi

Original price was: ₹249.00.Current price is: ₹248.00.
"मिथिला की रणभूमि" मिथिला के योद्धाओं की शौर्य गाथा को आप तक लाने का प्रयास है । विदेह से लेकर खण्डवला राजवंश तक के युद्ध इतिहास को इसमें दिखाने का प्रयास किया गया है । यह पुस्तक एक दस्तावेज ही नहीं बल्कि सुधी पाठकों के लिए उनके शक्तिशाली अतीत का एक सम्पूर्ण ज्ञानकोष भी साबित होगा ।" Expected Time of Delivery: Within 10-14 Days
Dastan E Pakistan

History

Dastan E Pakistan

Original price was: ₹249.00.Current price is: ₹199.00.
पाकिस्तान का इतिहास अक्सर विभाजन के इर्द-गिर्द भटक कर रह जाता है। जबकि यह एक देश के बनने की शुरुआत ही थी। 1947 के बाद पाकिस्तान का सफ़र कैसा रहा? किन-किन मील के पत्थरों से गुजरा? उन रास्तों में क्या-क्या मुश्किलें आयी? भारत में पढ़ाए जा रहे इतिहास, और पाकिस्तान में पढ़ाए जा रहे इतिहास में जो स्वाभाविक अंतर है, उस से अलग एक तीसरा बिंदु भी ढूँढा जा सकता है। वह बिंदु, जहाँ से शायद वह चीजें भी नज़र आए, जो इन दोनों देशों के रिश्तों के सामने धुंधली पड़ जाती है। Expected Time of Delivery: Within 10-14 Days
Mithila Ki Lok Chitrakalayen, Laxminath Jha, Mithila Painting

History

Mithila Ki Sanskrtika Lok Citrakala

Original price was: ₹1,500.00.Current price is: ₹1,499.00.
पण्डित लक्ष्मीनाथ झा विरचित 'मिथिला की सांस्कृतिक लोकचित्रकला' अपनी कतिपय विशेषताओं के कारण कला-जगत की एक अनुपम कृति है। मिथिला की लोककला से सम्बद्ध 45 रंगीन चित्रों से सुसज्जित तथा  वैदिक, पौराणिक, तांत्रिक एवं कतिपय अन्य शास्त्रीय प्रमाणों से सम्पुष्ट तथ्यों के आधार पर विगत सदी के छठे दशक के आरम्भिक कालखण्ड में रचित व प्रकाशित एक कालजयी पुस्तक है । Expected Time of Delivery: Within 10-14 Days
Mantunma, Anchlik Kahani, Bhadesh Bhasha ka vyang

Non Fiction

Mantunma

Original price was: ₹99.00.Current price is: ₹60.00.
मन्टुनमा एक आम आदमी है । मैंगो मैन टाइप । मालिक का पोसुआ और गाँव का गमार । चटोर है लेकिन कामचोर नहीं । दिन भर खटता है और रात को झलरी के साथ ठसक से सोता है । देशी भाषा लिखी गई व्यंग्य जो आपको गाँव की और खीच लेगा ।   All books are shipped within 2-3 days of receiving an order.
Khandwala Rajvansha, Mithilabhashamay itihas

History

Khandavala Rajavansh: Mithilabhashamaya Itihas

Original price was: ₹599.00.Current price is: ₹500.00.
मिथिला के इतिहास को समझने के लिये यह किताब एक एन्साइक्लोपीडिया है । बिना इस पुस्तक के तिरहुत का इतिहास अधुरा माना जाएगा । All books are shipped within 2-3 days of receiving an order.
The Crisis of Succession

History

The Crisis of Succession : Palace Intrigues

Original price was: ₹749.00.Current price is: ₹649.00.
Mithila as a region is far greater in expanse than the mere physical boundaries of the Raj  Darbhanga. But Darbhanga was always considered as the representative of the ancient Mithila. The last dynasty to rule from Darbhanga was known as the ‘Khandavala’ and it had produced eighteen illustrious personalities who adorned the throne of  Mithila Raj. Sir Kameshwar Singh was the last Maharajadhiraja and after his sudden and mysterious death on 1st October, 1962, the dynasty came to an abrupt end, though the era  of monarchy had ceased to exist for all  practical purposes on 15 August, 1947, when India, after getting independent from the colonial rule of Britain, decided to adopt democracy for governance. The socio-economic-political and cultural life of the people of Mithila had always been inextricably intertwined with the  power ruling Mithila. These illustrious rulers  were instrumental in establishing and continuation of supremacy of knowledge over economy or polity. Mithila, being primarily a peasant society, flirted in a big way with industrialization between 1840 and till the end of 1960s, only to end up being one of the poorest and most under-developed regions of India. This book tries to look into the factors and conditions which led to, not only the end  of the dynasty, but also the fall of this great cultural zone which had risen like a meteor on the national stage, and dominated the political/cultural/economic movement from  1879 to 1960s. It tries to explore the inter-personal aspirations and intrigues due to ambition without ability of the members of the first family, through the - diaries/ documents/ letters, etc. It tries to bring to the fore, the events and change in mind-set of the  people as the “Yuga of monarchy’ comes to an end and “Yuga of democracy’ takes over. The book raises questions and cajoles the readers  to have a rational view on the era and the dominating events.
Garbhnal Manjit Thakur

Fiction

Garbhnal by Manjit Thakur

Original price was: ₹399.00.Current price is: ₹349.00.
एक दुर्घटना का शिकार हुए अभिजीत को अचानक पता लगता है कि उसकी जिंदगी से सात साल गायब हो चुके हैं. इन सात सालों में दुनिया बदल गई थी, देश-समाज-सरकार में परिवर्तन आ गया था और बदल गए थे लोग! उसकी प्रेमिका मृगांका भी किसी और हो चुकी थी. अभिजीत की जिंदगी में अब गिनती की सांसे बची हैं और तब वह गृहनगर और पैतृक इलाके में अपनी जड़ों की खोज-यात्रा में निकल पड़ता है. वह अपने अंतिम दिनों में उन इलाकों को एक बार देख लेना चाहता है जहां उसका बचपन गुजरा है. और तब उसको उन स्थानों के लोकदेवता (डेमी-गॉड्स) प्रत्यक्ष दिखने लगते हैं. साथ ही, वह वर्तमान और अतीत की सदेह यात्रा करने लगता है. उसके जीवन बचाने की एक दैवीय शर्त होती है, जिसको पूरा करने के लिए आगे आती है उसकी प्रेमिका मृगांका, जो अब भी उसकी प्रतीक्षा में होती है.
JP and Renaissance

History

JP & Renaissance Combo

Original price was: ₹398.00.Current price is: ₹299.00.
जेपी और रिनेशाँ डॉ प्रवीण झा की किताब है । प्रवीण झा वर्तमान में नॉर्वे में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं । लेकिन इन्‍हे अपनी रचनाओं में कठिन चीजों को भी आसानी से समझा पाने की कला है । इतिहास को केन्द्र  में रखकर लिखी गई यह दोनों पुस्तक इतनी रुचिकर है कि आप सहज ही आनंदित हो उठेंगे । भारतीय नवजागरण ओर जेपी के समाजवाद को समझने के लिये इससे अच्छी  पुस्तक इतनी आसान भाषा में अन्य कहीं मिल पाना मुश्किल है । काँम्बो के रूप में यह दोनो पुस्तक पाठकों के विशेष मांग पर एक साथ उपलब्ध है । All books are shipped within 2-3 days of receiving an order.
Kosi ke Vat Vriksha, Pushya Mitra

Non Fiction

Kosi Ke Vat Vriksh

Original price was: ₹199.00.Current price is: ₹149.00.
कोसी के वट वृक्ष उन बुजुर्गों की कहानी है जिन्होंने 2008 में आई भीषण कोसी बाढ़ के बाद न केवल अपने तन कर खड़े हुए बल्कि दूसरों को भी सुरक्षा प्रदान की। अक्षयवट बुजुर्ग महासंघ, निर्मली, सुपौल की यह प्रेरक कहानी बुढ़ापे से जुड़े आपके सभी पूर्वाग्रह को बदल कर रख देगी । All books are shipped within 2-3 days of receiving an order.
Darbhanga Chronicles

History

Darbhanga Chronicles

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹199.00.
Darbhanga Raj, a province that was in modern-day Bihar, has had its roots since 1000 AD and has contributed immensely to the country. This royal family has harbored its people through some turbulent times, crafted skillful leaders, and contributed virtually to the liberation of India. “Darbhanga Chronicles” by Tejkar Jha introduces the royal family while documenting how the rulers played a crucial role pre- and post-independence. The book is explored in six facets: history, amity, politics, vision, change, & journal.
The first Partition of India : Sugauli Treaty

History

The first Partition of India : Sugauli Treaty

Original price was: ₹799.00.Current price is: ₹699.00.
This book takes readers on a journey back to the 18th century, witnessing the unification of Nepal, the intrigues and machinations of the British East India Company, and the events leading to the first partition of the country through the formalisation of the boundary between Nepal and India. Spanning nearly a century, these developments had profound and far-reaching negative impacts on Mithila/Tirhut, a historically significant region that was divided between two nations. Despite this physical division, the people of Mithila remained deeply connected to their brethren across the newly drawn political boundary. While the ruling families were undermined by British treachery and the greed of newly established smaller zamindars, the region’s cultural, linguistic, and intellectual unity endured. As descendants of great sages such as Janak and Yajnavalkya, and as inheritors of Mithila’s rich cultural and intellectual legacy, the people of the region remained bound by their shared heritage and the enduring ties of brotherhood, epitomised by Bhagawati Sita.