Ayachi

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‘‘मनुष्य से याचना करना महापाप है। मनुष्य को केवल ईश्वर से याचना करने का अधिकार है’’ करीब 600 साल पहले मिथिला के इस दर्शन को अपने जीवन में उतारनेवाले महामहोपाध्याय श्री भवनाथ मिश्र प्रसिद्ध ‘अयाची’ के जीवन पर आधारित इस नाटक में मिथिला की ज्ञान परंपरा, सामाजिक इतिहास और भौतिक संतुष्टि के संस्कार को बेहतरीन तरीके से लिपिबद्ध किया गया है। इस नाटक का पहला संस्करण 1961 में प्रकाशित हुआ । दूसरा संस्करण आपके समक्ष है

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ISBN- 9798881269 , , ,

Description

अयाची

बिहार में राष्ट्रीय स्वयं सेवक के प्रथम प्रचारक और पांचजन्य अखबार के फाउंडिंग एडिटर श्री काशीनाथ मिश्र रचित नाटक ‘अयाची’ आधुनिक मैथिली साहित्य में अभिनेय नाटक की अनमोल कृति है।

‘‘मनुष्य से याचना करना महापाप है। मनुष्य को केवल ईश्वर से याचना करने का अधिकार है’’ करीब 600 साल पहले मिथिला के इस दर्शन को अपने जीवन में उतारनेवाले महामहोपाध्याय श्री भवनाथ मिश्र प्रसिद्ध ‘अयाची’ के जीवन पर आधारित इस नाटक में मिथिला की ज्ञान परंपरा, सामाजिक इतिहास और भौतिक संतुष्टि के संस्कार को बेहतरीन तरीके से लिपिबद्ध किया गया है। इस नाटक का पहला संस्करण 1961 में प्रकाशित हुआ । दूसरा संस्करण आपके समक्ष है

 

स्वo श्री काशी नाथ मिश्र का जन्म 21 सितम्बर, 1921 ईo को  लालगंज गाँव में हुआ था। आप श्री शक्ति नाथ मिश्र प्रसिद्ध पं० श्री अनन्त मिश्र के पुत्र थे। श्री काशी नाथ मिश्र अपने बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (तत्कालीन जनसंघ) के बाल स्वयंसेवक के रूप मे जुड़ गए थे और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सबसे बड़े प्रशिक्षण ओoटीoसीo (जिसका अंतिम प्रशिक्षण प्रतिवर्ष नागपुर में होता है) प्राप्त किए थे । उस प्रशिक्षण में आप राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक सरसंघचालक डाo केशव बलिराम हेडगेवारक सबसे प्रिय स्वयंसेवकों में से एक बन गए थे। उस प्रशिक्षण के मध्य स्वo श्री अटल बिहारी बाजपेयी इनके अभिन्न मित्र बन गए थे। डाo हेडगेवार जी ने ही इन्हें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बिहार प्रान्त का पहला प्रान्त प्रचारक बनाया था। जब सन् 1948 ई0 में स्वo श्री दीन दयाल उपाध्याय द्वारा लखनऊ से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मुख पत्रिका ‘‘पाञ्चजन्य’’ और ‘‘राष्ट्रधर्म’’ प्रारम्भ किया गया तो श्री काशी नाथ मिश्र और श्री अटल बिहारी बाजपेयी को पहले छद्म रूप और बाद में सामान्य रूप से इसके प्रकाशन और संपादन का जिम्मा दिया गया। ‘‘अयाची’’ और ‘‘दिग्विजय’’ इनकी प्रकाशित पुस्तके हैं। ‘‘गोलकुण्डा का डाकू’’ पुस्तक तथा कुछ और साहित्य अभी अप्रकाशित ही है। दिनांक 10 दिसम्बर, सन् 1991 ई0 को आप इस दुनियां को छोड़कर गौलोक चले गये ।

 

ISBN

9798881269

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