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The Headmaster (Ambikanath Mishra Birth Centenary Memorial Volume)

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This book ‘the Headmaster’ is of its own kind and a rare collection of some of the most attractive and brilliant papers well researched by eminent scholars concerned.

This intellectual tribute to the cherished memory of Ambikanath Mishra , the most talked about headmaster of his era, will by all means go a very long way in the history of commemorative writings.

This multilingual book is divided into 3 parts and running into 640 pages containing more than 117 academic , scholarly articles and memoirs  by renowned intellectuals.  Throwing light on almost all significant branches of learning, this unique book has proved to be an asset to any individual and institiuaional collection.

द हेडमास्टर मिथिला के प्रख्यात विभूति अयाची मिश्र के वंशज मास्टर साहेब के नाम से मशहूर श्री अम्बिकानाथ मिश्र की 100वीं जयंती पर देश विदेश में फैले उनके छात्रों की ओर से तर्पण है। इस ग्रंथ में तीन भाषाओं यथा मैथिली, हिन्दी और अंग्रेजी का समावेश है। देश विदेश में विभिन्न पदों पर विराजमान श्री अम्बिकानाथ मिश्र के शिष्यों ने इस ग्रंथ के रूप में कुल 117 शोधपरक आलेखों का अनमोल तर्पण दिया है। इसमाद प्रकाशन इस अनमोल ग्रंथ को छापकर गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

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ISBN- ‎ 9788194984580 ,

Description

द हेडमास्‍टर

This book ‘the Headmaster’ is of its own kind and a rare collection of some of the most attractive and brilliant papers well researched by eminent scholars concerned.

This intellectual tribute to the cherished memory of Ambikanath Mishra , the most talked about headmaster of his era, will by all means go a very long way in the history of commemorative writings.

This multilingual book is divided into 3 parts and running into 640 pages containing more than 117 academic , scholarly articles and memoirs  by renowned intellectuals.  Throwing light on almost all significant branches of learning, this unique book has proved to be an asset to any individual and institiuaional collection.

द हेडमास्टर मिथिला के प्रख्यात विभूति अयाची मिश्र के वंशज मास्टर साहेब के नाम से मशहूर श्री अम्बिकानाथ मिश्र की 100वीं जयंती पर देश विदेश में फैले उनके छात्रों की ओर से तर्पण है। इस ग्रंथ में तीन भाषाओं यथा मैथिली, हिन्दी और अंग्रेजी का समावेश है। देश विदेश में विभिन्न पदों पर विराजमान श्री अम्बिकानाथ मिश्र के शिष्यों ने इस ग्रंथ के रूप में कुल 117 शोधपरक आलेखों का अनमोल तर्पण दिया है। इसमाद प्रकाशन इस अनमोल ग्रंथ को छापकर गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

अम्बिकानाथ मिश्र मिथिला के प्रख्यात विभूति अयाची मिश्र एवं शंकर मिश्र के वंशज हैं। इनके पिता यदुनाथ मिश्र न्यायशास्त्र के अप्रतिम विद्वान थे। न्याय पर लिखी गई इनकी 4 मूल पुस्तक अपने विषय में अमूल्य धरोहर हैं।

अम्बिकानाथ मिश्र ने अपने जीवन को शिक्षण के क्षेत्र में समर्पित कर दिया। एक लब्धप्रतिष्ठ शिक्षक एवं शैक्षणिक प्रशासक के रूप में इन्होंने अपने को स्थापित किया एवं यशस्वी हुए। ये अंग्रेजी, गणित और अर्थशास्त्र विषय के विद्वान होने के साथ-साथ विभिन्न भारतीय भाषाओं यथा संस्कृत, बांग्ला, मैथिली आदि के ज्ञाता एवं मर्मज्ञ थे। लक्ष्मीश्वर एकेडमी, सरिसब, मधुबनी में इन्होंने 34 वर्षों तक शिक्षण कार्य किया। इस दौरान श्री मिश्र ने अनगिनत छात्रों का शैक्षणिक जीवन एवं चरित्र का निर्माण किया। इनकी इस उपलब्धि के उदाहरण शिक्षा, साहित्य, प्रशासन, विज्ञान, गणित, चिकित्सा शास्त्र आदि विषयों में सफल हुए कई छात्र – छात्राएँ समाज के गौरव रहे हैं।

श्री मिश्र ने अर्थशास्त्र पर एक पुस्तक ‘अर्थशास्र प्रवेश’ लिखने के अतिरिक्त अपने जीवन काल के अंतिम चरण में सुभाष चन्द्र बोस की आत्मकथा का मैथिली में ‘एक भारतीय यात्री’ शीर्षक से अनुवाद किया, जो 2011 में प्रकाशित हुआ। 1944-45 में इन्होंने ‘सर्चलाईट’ दैनिक अखबार में पत्रकारिता भी की। निपुण अभिभावक तथा समर्पित समाजसेवी के साथ अम्बिकानाथ मिश्र ‘हेडमास्टर’ के रूप में प्रख्यात थे।

 

ISBN

9788194984580

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